तुम्हारे होने और ना होने के बीच जो भी कुछ था तुम्हारे होने और ना होने के बीच जो भी कुछ था
प्रखर है बस एक तुम्हारा वो चाहेगा बस एक तुम्हीं को ! प्रखर है बस एक तुम्हारा वो चाहेगा बस एक तुम्हीं को !
रात-दिन सुबह-संध्या आती तेरी यादें। रात-दिन सुबह-संध्या आती तेरी यादें।
हम तो हर हाल में भला ही चाहेंगे दूर रहो चाहे पास कसम से हम तो हर हाल में भला ही चाहेंगे दूर रहो चाहे पास कसम से
अब मुझे ढूँढना और पाना तुम्हें होगा। अब मुझे ढूँढना और पाना तुम्हें होगा।
यह कविता उन महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित है जिन्होंने हमें वर्षों की गुलामी से मुक्त... यह कविता उन महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित है जिन्होंने हमें वर्षो...